23 मार्च
2023 को एक निजी
विश्वविद्यालय, आईटीएम युनिवर्सिटी में
समाजवादी नेता डा.लोहिया पर केंद्रित
एक पुस्तक के
विमोचन हेतु ग्वालियर
पधारे जम्मू-कश्मीर
के महामहिम उपराज्यपाल
श्री मनोज सिन्हा
ने राष्ट्रपिता महात्मा
गांधी जी की
लंदन से हासिल
बैरिस्टर की उपाधि
को नकली
बताने का सनसनीखेज
आरोप लगाया था।
बापू के अपमान के लिए ग्वालियर शहर का चयन अनायास नहीं किया गया। गांधी के हत्यारे को पिस्तौल उपलब्ध कराने का कभी न मिटने वाला कलंक ग्वालियर के माथे पर पहले से लगा हुआ है। यहां गोड़से मंदिर का निर्माण का नाटक भी हर साल होता है। ये लोग खुद ही फोन करके पुलिस व मीडिया को बुलाते हैं, घंटे दो घंटे के फोटो सेशन के बाद वे सब अपने काम धंधे में लग जाते हैं।
उपराज्यपाल जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा बापू की डिग्री को संदेहास्पद बताए जाने से महीनों यह मामला सुर्खियों में रहा, लेकिन दुर्भाग्यवश प्रधानमंत्री जी, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और स्वयं महामहिम की ओर से कोई खंडन नहीं आया। कार्यक्रम के आयोजक समाजवादी नेता राम शेकर सिंह की ओर से भी असहमति का स्वर सुनाई नहीं दिया।तब एक गांधीवादी पत्रकार डा. राकेश पाठक ने कार्यक्रम के अगले ही दिन अर्थात 24 मार्च 2023 को उपराज्यपाल महोदय को कानूनी नोटिस भेजकर निर्धारित समयावधि के भीतर इस अक्षम्य अपराध के लिए बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई। नोटिस की प्रति महामहिम राष्ट्रपति को भी भेजी गई। दी गई समय सीमा में उपराज्यपाल की कोई प्रतिक्रिया न आने पर डा.पाठक ने अपने वकीलों के माध्यम से ग्वालियर के सक्षम न्यायालय में उपराज्यपाल के विरुद्ध प्रायवेट कंप्लेंट प्रस्तुत कर दी गई।
माननीय न्यायालय ने ग्राह्यता के बिंदु पर तर्क प्रस्तुत करने के लिए 21 जून 2023 की तिथि निर्धारित की है।
डा. पाठक के हौसले व वैचारिक प्रतिबद्धता को सैल्यूट तो बनता है।
